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    भारत के सबसे मेधावी छात्रों की यात्रा - अब कहां हैं जेईई एआईआर 1 टॉपर?
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    • भारत के सबसे मेधावी छात्रों की यात्रा - अब कहां हैं जेईई एआईआर 1 टॉपर?

    भारत के सबसे मेधावी छात्रों की यात्रा - अब कहां हैं जेईई एआईआर 1 टॉपर?

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    Alok MishraUpdated on 10 Apr 2026, 12:12 PM IST
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    हर साल, 15 लाख से अधिक छात्र भारत की सबसे कठिन शैक्षणिक परीक्षाओं में से एक जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (Joint Entrance Examination- JEE) में भाग लेते है। इनमें से केवल एक छात्र ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर पाता है। ऐसा सम्मान देश की सर्वोच्च शैक्षणिक उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। इन छात्रों को भारत के सबसे तीक्ष्ण दिमागों में गिना जाता है। लेकिन आईआईटी से निकलने के बाद उनके साथ क्या होता है; वह अपने कॅरियर यात्रा में किस पड़ाव पर हैं यदि इसमें आपकी रुचि है तो इस लेख में आपको इसकी जानकारी मिलेगी।

    This Story also Contains

    1. प्रतिभा पलायन की समस्या
    2. सबसे प्रतिभाशाली दिमाग कहां बसते हैं: जेईई टॉपर्स का वैश्विक वितरण
    3. समय के साथ बदलाव: बढ़ा है विदेश का रुझान
    4. ग्रैजुएट स्टडीज के लिए जेईई टॉपर कहां गए?
    5. जेईई टॉपर का कॅरियर पथ: अकादमिक से उद्योग जगत तक
    6. डेटा के पीछे की कहानियां : जीवन और चुने गए विकल्प
    7. क्वांट फाइनैंस का आकर्षण:
    8. गहन शोध की राह :
    9. विमर्श का विषय
    भारत के सबसे मेधावी छात्रों की यात्रा - अब कहां हैं जेईई एआईआर 1 टॉपर?
    भारत के सबसे मेधावी छात्रों की यात्रा

    कॅरियर्स360 द्वारा 1990 से 2020 तक के JEE टॉपर्स पर किए गए एक विस्तृत अध्ययन से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आता है। अध्ययन का परिणाम भारत में प्रतिभा पोषण और उनको रोके रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाता है। सामने आए डेटा से महत्वाकांक्षा, अवसर और वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति का पता चलता है। चिंता की एक बात यह है कि इस प्रवृत्ति में पिछले तीन दशकों में और बढ़ोतरी देखने में आई है।

    प्रतिभा पलायन की समस्या

    सन् 1990 से 2020 के दौरान कुल 31 विद्यार्थियों ने जेईई में टॉप रैंक हासिल की:

    श्रेणी

    संख्या

    प्रतिशत

    विदेश में

    23

    74.20%

    भारत में

    8

    25.80%

    जब 1990 से 2020 के बीच के 31 जेईई टॉपर्स के डेटा का विश्लेषण किया गया, तो एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया:

    • इन 31 टॉपर्स में से 23 विदेश में रहकर अनपी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि केवल 8 भारत में हैं।
      यानी लगभग 74% टॉपर्स भारत से बाहर जा रहे हैं।

    • भारत में रहने वाले इन 8 में से भी 5 उम्मीदवार भारत में रहकर बहुराष्ट्रीय या विदेशी वित्तपोषित कंपनियों में काम कर रहे हैं।

    • पिछले 30 वर्षों में भारत के टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्रों में से सिर्फ 3 ही भारतीय कंपनियों या संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं। कुल मिलाकर 10% से भी कम टॉपर्स भारतीय कंपनियों में कार्यरत हैं।

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    दूसरे शब्दों में कहा जाए तो भारत के लगभग तीन-चौथाई सबसे अधिक प्रतिभावान छात्र अपनी प्रतिभा, शोध और नवाचार के जरिए भारत के बाहर की अर्थव्यवस्थाओं में अपना योगदान दे रहे हैं। और इनमें से आधे से भी अधिक ने यूनाइटेट स्टेट्स को अपना स्थायी निवास बना लिया है।

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    सबसे प्रतिभाशाली दिमाग कहां बसते हैं: जेईई टॉपर्स का वैश्विक वितरण

    अमेरिका का दबदबा, भारत में केवल 26% ही जेईई टॉपर रुके रह गए

    देश

    संख्या

    प्रतिशत

    यूएसए

    17

    54.80%

    भारत

    8

    25.80%

    स्विटजरलैंड

    2

    6.50%

    कनाडा

    1

    3.20%

    नीदरलैंड

    1

    3.20%

    हांगकांग

    1

    3.20%

    दक्षिण कोरिया

    1

    3.20%

    सभी जेईई एआईआर 1 टॉपर्स में से आधे से अधिक (31 में से 17) अब संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) को अपना ठिकाना बना चुके हैं। इससे लंबे समय से चले आ रहा ट्रेंड दिखता है, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, शीर्ष स्तर के विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के मेल वाला देश भारत के सबसे प्रतिभाशाली लोगों के लिए एक स्वाभाविक गंतव्य बन गया है। यही बात ऊपर दी गई टेबल से भी पता चलती है कि आईआईटी से निकलने वाले 75% छात्र भारत के बाहर हैं इसमें से 55% छात्र अकेले अमेरिका में और शेष 20% प्रतिशत पूरी दुनिया में।”

    अमेरिका के प्रति इनका लगाव आगे की पढ़ाई के चुनावों में भी साफ दिखता है। आगे की पढ़ाई का चुनाव करने वाले टॉपर्स में से 55% ने स्टैनफोर्ड और एमआईटी का रुख किया और लगभग 90% छात्रों ने अपने मास्टर्स या पीएचडी के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों का चुनाव किया।

    समय के साथ बदलाव: बढ़ा है विदेश का रुझान

    समय के साथ भारत में प्रतिभा पलायन की समस्या के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

    अवधि

    भारत

    भारत से बाहर

    1990–2010

    7 (33.3%)

    14 (66.70%)

    2011–2020

    1 (10%)

    9 (90%)

    जेईई टॉपर्स द्वारा विदेशों को कार्यक्षेत्र के रुप में चुनाव करने के विकल्पों में समय के साथ एक तेजी देखने में आई है, जिससे प्रतिभा पलायन की गंभीरता पता लगती है। जहां 1990 से 2010 के बीच, 21 टॉपर्स में से 7 (33%) ने भारत में रहकर काम करने का विकल्प चुना तो 14 (67%) ने विदेश का रुख किया। इसके बाद के दशक, यानी 2011 से 2020 के बीच, यह स्थिति तेजी से बदल गई: और 10 में से सिर्फ 1 टॉपर (10%) ही भारत में रुका, जबकि 9 (90%) ने देश के बाहर अपनी सेवाएं देने का फैसला किया।

    ग्रैजुएट स्टडीज के लिए जेईई टॉपर कहां गए?

    यूनिवर्सिटी

    संख्या

    स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी

    6

    मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यूएसए

    5

    कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी

    1

    ईटीएएच ज्यूरिख

    1

    हार्वर्ड यूनिवर्सिटी

    1

    प्रिंसटन यूनिवर्सिटी

    1

    रटगर्ज (Rutgers) यूनिवर्सिटी

    1

    यूसी सैन डियागो

    1

    कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी

    1

    कैंब्रिज यूनिवर्सिटी

    1

    उच्च शिक्षा के लिए जाने वालों में से स्टैनफोर्ड और एमआईटी के हिस्से में इन 19 टॉपर्स में से 11 छात्र आए। यानी सभी पोस्ट ग्रेजुएशन विकल्पों का चुनाव करने वालों में से 55% इनसे जुड़े। इन छात्रों में से लगभग 90% अब यूएसए में हैं, जबकि बाकी कुछ छात्रों ने स्विट्ज़रलैंड, यूके और अन्य देशों के वैश्विक संस्थानों का रुख किया।

    गत 30 वर्षों के दौरान जेईई टॉपर के चुनाव: आईआईटी बॉम्बे का दबदबा, 16 ने यहां प्रवेश लिया

    अध्ययन

    कोर्स

    संख्या

    कुल

    आईआईटी बॉम्बे

    बीटेक सीएसई

    13

    16 (51.60%)

    बीटेक ईई

    2

    बीटेक ईईई

    1

    आईआईटी कानपुर

    बीटेक सीएसई

    7

    7 (22.60%)

    आईआईटी दिल्ली

    बीटेक सीएस

    1

    4 (12.90%)

    बीटेक सीएस ऑनर्स

    1

    बीटेक सीएसई

    2

    आईआईटी मद्रास

    बीटेक सीएसई

    2

    2 (6.50%)

    एमआईटी यूएसए

    बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस

    1

    2 (6.50%)

    एम इंजी कंप्यूटर साइंस

    1

    जेईई के सभी टॉपर्स में से आधे से अधिक (31 में से 16) ने आईआईटी बॉम्बे को चुना, जिससे यह निर्विवाद रूप से टॉपर्स का चहेता संस्थान बनकर उभरा। इसके बाद आईआईटी कानपुर रहा जिसे सात टॉपर्स ने चुना, जबकि अन्य विकल्पों में आईआईटी दिल्ली, मद्रास और यहां तक कि एमआईटी यूएसए के नाम शामिल हैं। हालांकि, 2007 के बाद से लगभग हर टॉपर द्वारा आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग प्रोग्राम के चुनाव ने इसकी अग्रणी स्थिति और बेहतर करने का काम किया।

    विदेश से पीएचडी और मास्टर्स करते हैं सभी जेईई टॉपर्स

    देश

    संख्या

    विदेश

    भारत

    पीएचडी

    13

    100%

    0%

    मास्टर्स

    6

    उच्च शिक्षा के विकल्प का चुनाव करने वाले सभी जेईई टॉपर ने भारत से बाहर के ही किसी संस्थान को चुना। 1990 से 2020 के बीच 31 AIR 1 रैंक होल्डर्स में से 19 ने विदेशों से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इनमें से छह ने मास्टर्स किया, और 13 ने डॉक्टरेट। एक भी छात्र ने उच्च शिक्षा के लिए भारत में अध्ययन करने का फैसला नहीं किया।

    जैसा कि डेटा भी बताता है कि उच्च शिक्षा के लिए हर आईआईटी जेईई टॉपर ने भारत के बाहर का विकल्प चुना। इस समग्र शैक्षणिक पलायन से एक कठोर सच्चाई उजागर होती है: भारत के सबसे प्रतिभाशाली दिमाग शोध और पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षण के लिए देश की सीमाओं से लगातार बाहर जा रहे हैं, और इनमें से कोई अपने शैक्षणिक कॅरियर बनाने के लिए भारत नहीं लौटता।

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    जेईई टॉपर का कॅरियर पथ: अकादमिक से उद्योग जगत तक

    श्रेणी

    संख्या

    प्रतिशत

    अकादमिक क्षेत्र/ शोध

    10

    32.30%

    बड़ी टेक कंपनियां

    7

    22.60%

    क्वांट/ फाइनैंस

    6

    19.40%

    स्टार्टअप/लीडरशिप

    3

    9.70%

    इंटर्न/ शुरुआत

    2

    6.50%

    शासकीय

    1

    3.20%

    अन्य

    2

    6.50%

    वर्ष 2000 से पहले तक टॉपर्स अधिकतर अकादमिक और शोध के क्षेत्र की ओर आकर्षित होते थे। उस दौर के 11 में से छह टॉपर्स ने अकादमिक कॅरियर को चुना, जिनमें से कई शीर्ष वैश्विक विश्वविद्यालयों में प्रतिष्ठित प्रोफेसर बन गए।

    लेकिन 2000 के बाद इस रुझान में नाटकीय बदलाव आया। अब अधिकांश टॉपर्स उच्च शिक्षा के बजाय बड़ी टेक कंपनियों, क्वांटिटेटिव फाइनेंस और स्टार्टअप्स में कॅरियर चुनते हैं, और तेजी से कॉर्पोरेट जगत की सीढ़ियां चढ़ने लगते हैं।

    डेटा के पीछे की कहानियां : जीवन और चुने गए विकल्प

    इन असाधारण व्यक्तियों के जीवन में कई प्रेरणादायक कहानियां छिपी हैं, जो सांख्यिकीय आंकड़ों के परे उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण चुनावों को उजागर करती हैं।

    सुभाष खोत (1995 के जेईई टॉपर) न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के कूरंट इंस्टीट्यूट (Courant Institute) में कंप्यूटर साइंस के जूलियस सिल्वर प्रोफेसर हैं। उन्हें 2002 में Unique Games Conjecture की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है। Unique Games Conjecture अब सैद्धांतिक कंप्यूटर साइंस में सबसे अधिक अध्ययन किया जाने वाला प्रमाणरहित अनुमान बन गया है।

    संजीव अरोड़ा, वर्ष 1986 के जेईई टॉपर हैं, यह सुभाष खोत के पीएचडी सुपरवाइज़र भी रहे। उन्होंने आईआईटी कानपुर में दो साल सेवा देने के बाद एमआईटी चले गए। अब वे प्रिंसटन में कंप्यूटर साइंस के चार्ल्स सी. फिट्जमॉरिस प्रोफेसर की भूमिका में हैं। ये बड़े एआई मॉडल के अध्ययन के लिए समर्पित प्रिंसटन लैंग्वेज ऐंड इंटेलिजेंस यूनिट के संस्थापक निदेशक हैं। इस प्रकार, 1986 और 1995 के टॉपर्स को कंप्यूटर साइंस के इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित सलाहकार-छात्र (advisor-student) जोड़ियों में से एक हैं।

    अरविंद सराफ (1997) – सूरत के एक मारवाड़ी व्यापारी परिवार से संबंध रखने वाले सराफ ने 10वीं कक्षा के बाद ही जेईई की तैयारी शुरू की। आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की और फिर एमआईटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। सराफ ने Google India में काम किया, लेकिन 2008 में नौकरी छोड़कर एक तकनीक-संचालित स्वास्थ्य सेवा एनजीओ स्वस्थ इंडिया (Swasth India) के सह-स्थापक की भूमिका में नजर आए। यह एनजीओ भारत के गरीबों को लक्ष्य करता है। अपने उद्देश्यों के चलते यह रतन टाटा द्वारा किए गए शुरुआती वेंचर कैपिटल निवेशों में से एक को हासिल करने में सफल रहा।

    रीना पाणिग्रही (1991) – जेईई में टॉप करने के बाद रीना पाणिग्रही पहले Microsoft Research में प्रमुख शोधकर्ता बनीं और बाद में Google Research में।

    नितिन गुप्ता (2000) ने यूसी सैन डियागो में कंप्यूटर साइंस से जीव विज्ञान के क्षेत्र में जाने का अचरज भरा फैसला किया, और फिर 2014 में आईआईटी कानपुर में बायोलॉजिकल साइंसेज विभाग में फैकल्टी मेंबर के रूप में लौटे। वे उन बहुत कम टॉपर्स में से एक हैं जिन्होंने स्थायी रूप से भारत लौटकर अकादमिक कॅरियर बनाया।

    रुझान: 1990 के दशक के अधिकतर टॉपर्स का झुकाव अकादमिक क्षेत्र की ओर रहा (11 में से 6), जबकि 2000 के बाद के टॉपर्स का झुकाव बड़ी टेक कंपनियों, फाइनेंस (क्वांट ट्रेडिंग) और स्टार्टअप्स की ओर तेजी से बढ़ा।

    एमआईटी की ओर पलायन अनूठा रुझान-

    सतवात जगवानी (जेईई टॉपर, 2015) ने आईआईटी बॉम्बे में प्रवेश लिया, लेकिन 2017 में इसे छोड़कर एमआईटी से कंप्यूटर साइंस में बीएस/एमएस प्रोग्राम करने चले गए।

    चित्रांग मुर्दिया (जेईई टॉपर, 2014) ने आईआईटी बॉम्बे के बीटेक (सीएस) में दाखिला लिया, लेकिन एक साल बाद छोड़कर एमआईटी से बैचलर्स (फिजिक्स) की पढ़ाई करने का विकल्प चुन लिया।

    चिराग फालोर (जेईई टॉपर, 2020) ने शीर्ष रैंक हासिल की, लेकिन किसी भी आईआईटी के बजाय सीधे एमआईटी को चुना, ताकि वे स्पेस साइंसेज और एस्ट्रोफिजिक्स रिसर्च में कॅरियर बना सकें।

    संघ लोक सेवा आयोग की राह:

    इम्मड़ी पृथ्वीतेज (2011 टॉपर) ने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद 2017 में यूपीएससी सीएसई में AIR 24 हासिल की। वर्तमान में वे आंध्र प्रदेश ईस्टर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

    क्वांट फाइनैंस का आकर्षण:

    सर्वेश मेहतानी (JEE टॉपर 2017) ने 2021 में आईआईटी बॉम्बे से बीटेक सीएस की पढ़ाई की और अब एम्स्टर्डम की कंपनी ऑप्टिवर (Optiver) में क्वांटिटेटिव ट्रेडर के रूप में काम कर रहे हैं। प्रणव गोयल (JEE टॉपर 2018) ने भी क्वांटिटेटिव ट्रेडर बनने का विकल्प चुना।

    गहन शोध की राह :

    अर्विंद थियागराजन (जेईई टॉपर, 2001) ने एमआईटी से पीएचडी की, गूगल और याहू में इंटर्नशिप की, उनके नाम 42 पेटेंट दर्ज हैं, और वर्तमान में वे Amazon में रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

    पल्लेरला साई संदीप रेड्डी (जेईई टॉपर, 2013) ने एमआईटी से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की और इसके बाद अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़े, फिर वे माइक्रोसॉफ्ट में शामिल हो गए।

    विमर्श का विषय

    निश्चत तौर पर हर टॉपर को अपने लिए उपलब्ध सर्वोत्तम अवसर चुनने का अधिकार है। लेकिन असली मुद्दा भारत में प्रतिभा पोषण के लिए मौजूद बुनियादी संरचना है जिसके बारे में इससे पता लगता है।

    आखिर देश के सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को यहां रोके रखने के लिए मजबूर करने वाला कोई कारण क्यों नहीं दिखता? भारत में विश्वस्तरीय ग्रेजुएट प्रोग्राम क्यों नहीं हैं जो इन छात्रों को एडवांस स्टडी के लिए रोके रखें? भारत में शोध कॅरियर सबसे प्रतिभाशाली छात्रों को क्यों नहीं लुभा पाते?

    अकादमिक शोध करने का ख्वाहिशमंद हर विद्यार्थी भारत के बाहर के ही विकल्प का चुनाव करता है। भारत अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को देश से ही मास्टर्स और शोध के लिए रोक पाने में कितना अच्छा है इससे इस तथ्य का स्पष्ट पता लग जाता है।

    भारत के जेईई टॉपर्स की कहानी असाधारण व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ ही चिंताजनक समग्र परिणाम देने वाली है। हर साल 15 लाख उम्मीदवारों में से सर्वश्रेष्ठ बनकर और भारतीय शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत सबसे शीर्ष पर पहुंचने वालों का प्रतिनिधित्व ये ये 31 व्यक्ति करते हैं।

    इनके कॅरियर यात्रा यह दिखाती है कि भारतीय प्रतिभा दुनिया में कहीं भी प्रतिस्पर्धा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती है। लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि भारत अब तक ऐसा वातावरण बना पाने में सफल नहीं हो सका है जो उसके सबसे तीक्ष्ण दिमागों को अपने देश में रहकर निर्माण और योगदान करने के लिए प्रेरित करता हो।

    शोध, नवाचार और तकनीक में दुनिया में अगुआ बनने के इच्छुक देश के लिए यह डेटा वास्तविक स्थिति की जांच करने के लिए मजबूर करने वाला होने साथ ही इस दिशा में समुचित कदम उठाने का आह्वान करने वाला भी है। भारत के सबसे प्रखर मस्तिष्क विदेश में काम करने के विकल्प को चुन रहे हैं। यक्ष प्रश्न यह है कि वे भारत का चुनाव करें इसके लिए क्या करना पड़ेगा?

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