अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H1B वीजा आवेदन नीति में बड़े बदलाव की घोषणा की है। अब तक इस वीजा ने हजारों भारतीयों को उनके अमेरिकन ड्रीम को साकार करने में मदद की है। H1B वीजा भारतीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को अमेरिका ले जाने की राह तैयार करने वाला तरीका रहा है।
प्रत्येक H-1B याचिका के लिए नियोक्ताओं को अब 1,00,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) का वार्षिक शुल्क का भुगतान करना होगा, नया नियम 21 सितंबर 2025 से प्रभावी हो गया है। इसके चलते यह इतना महंगा हो जाएगा कि नियोक्ता केवल "असाधारण रूप से कुशल" प्रतिभाओं को ही प्रायोजित करेंगे।
वित्तीय वर्ष (FY) 2023 में, जारी किए गए H-1B वीजा में से लगभग 72.3% भारतीयों को जारी किए गए। 2017-2019 के बीच भी भारतीयों को 70% से 72% H-1B वीजा प्रदान किए गए।
एक अनुमान के अनुसार, अमेरिका में लगभग 7,30,000 H-1B धारक सक्रिय हैं और लगभग 5,50,000 आश्रित (पति/पत्नी/बच्चे) रह रहे हैं। 12.8 लाख लोगों के H-1B परिवारों को मानते हुए और यह मानकर कि 72% भारतीय हैं, लगभग 9,16,000 भारतीयों का अमेरिकी सपने को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसका सीधा असर टेक क्षेत्र में भर्ती पर पड़ेगा। आईटी आधारित सेवा कंपनियां - इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो, एक्सेंचर, कॉग्निजेंट - की लाभार्जन क्षमता पर दबाव पड़ेगा। उनकी भर्ती प्रभावित होगी। भारतीयों को अमेरिका में ऑनसाइट काम के लिए भेजने वाली कंपनियों पर नई नीति का बड़ा प्रभाव पड़ेगा। भारतीय आईटी फर्मों के द्वारा दिए जाने वाले ऑनसाइट अवसरों में कमी आने की आशंका है। अमेरिकी कंपनियां भारतीय कर्मचारियों और उनके कौशलों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करेंगी।
इसका आशय है कि अब साधारण बीटेक डिग्री पर्याप्त नहीं होगी जिसके लिए अमेरिकी नियोक्ता किसी कर्मचारी को प्रायोजित करने के लिए 1,00,000 डॉलर का भुगतान करेगा। ऐसे में यदि आप चाहते हैं कि नियोक्ता आपके लिए इस खर्च को वहन करने को तैयार हो जाए तो आपके पास शीर्ष ग्रेड, विशेषज्ञता, या अमेरिकी पीजी डिग्री की आवश्यकता होगी।
नए खर्चों ने जूनियर-लेवल ऑनसाइट स्टाफिंग को अव्यावहारिक बना दिया है। फर्में H-1B वीजा की राह केवल सीनियर, विशेषज्ञ भूमिका वाले उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखेंगी। इसका असर कैंपस भर्ती पर भी निश्चित तौर पर पड़ेगा। अमेरिका में कम प्लेसमेंट का मतलब होगा कैंपस में कम ऑफर आएंगे। कैंपस जॉब ड्राइव के माध्यम से भर्ती की गति मंद होगी, विशेषकर सामान्य कोडिंग भूमिकाओं के लिए।
समूचे उद्योग जगत में बदलाव नजर आएगा। कंपनियां नजदीकी हब (मेक्सिको, पूर्वी यूरोप) में विकल्पों की खोज करने के साथ भारत से अधिक ऑफशोर डिलीवरी राह पर कदम बढ़ाती दिख सकती हैं। यह कदम अमेरिका में कामकाज के लिए स्थानीय लोगों को भर्ती किए जाने को बढ़ावा दिए जाने प्रयासों का हिस्सा है।
"आईटी कंपनी के माध्यम से ऑनसाइट" का रास्ता बंद हो रहा है। भविष्य विशेषज्ञों, नवाचारकों और वैश्विक खोजकर्ताओं का है। अमेरिकी ड्रीम खत्म नहीं हुआ है - लेकिन यह पहले से कहीं अधिक विशिष्ट और महंगा हो गया है।
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