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    बीटेक का बुलबुला? ज़रूरत से ज़्यादा लोग, छंटनी के चलते अब नौकरी पर लटकी तलवार
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    • बीटेक का बुलबुला? ज़रूरत से ज़्यादा लोग, छंटनी के चलते अब नौकरी पर लटकी तलवार

    बीटेक का बुलबुला? ज़रूरत से ज़्यादा लोग, छंटनी के चलते अब नौकरी पर लटकी तलवार

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    Maheshwer PeriUpdated on 12 Aug 2025, 12:33 PM IST
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    भारत की टेक इंडस्ट्री, जो कभी अपनी तेज विकास दर और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए जानी जाती थी, अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। भारतीय और वैश्विक, दोनों ही तरह की टेक कंपनियों द्वारा हाल ही में की गई छंटनी (layoff) ने इस क्षेत्र में रोजगार के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जहां नए इंजीनियरिंग स्नातकों की संख्या हर साल बढ़ रही है, वहीं 2023 से रोजगार के अवसर तेजी से कम होने लगे हैं, जिससे शिक्षा और रोजगार के बीच चिंताजनक अंतर पैदा हो रहा है।

    This Story also Contains

    1. 2012 से 2024 तक भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों की वृद्धि
    2. इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी स्नातक नामांकन 2010 से 2024 के दौरान वृद्धि
    3. कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग यूजी कार्यक्रम में नामांकन 2010 से 2024 तक
    4. शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों में कर्मचारी वृद्धि : 2010 बनाम 2025
    5. टीसीएस ने 12,000 वरिष्ठ, मध्य-स्तरीय कर्मचारियों की छंटनी की
    6. एआई अपनाने में वृद्धि के कारण आईटी रोजगार वृद्धि में गिरावट शुरू हो गई
    7. तकनीकी नियुक्ति पर स्वचालन (Automation) और एआई (AI) का प्रभाव
    8. तकनीकी नियुक्ति की बदलती गतिशीलता
    9. अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां छंटनी कर रही हैं (भारत में स्थित)
    10. छात्रों के लिए सलाह: नए तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयारी
    बीटेक का बुलबुला? ज़रूरत से ज़्यादा लोग, छंटनी के चलते अब नौकरी पर लटकी तलवार
    बीटेक का बुलबुला? ज़रूरत से ज़्यादा लोग, छंटनी के चलते अब नौकरी पर लटकी तलवार

    ठीक इसी समय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) दुनिया के कामकाजी तरीके को बदल रही है। एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग और एलन मस्क जैसे टेक दिग्गज छात्रों को पारंपरिक कोडिंग से आगे बढ़कर भौतिकी जैसे मुख्य विषयों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनकी यह सलाह ऐसे समय में आई है जब एआई के चलते कंपनियों की दक्षता बढ़ रही है— पर साथ ही कर्मचारियों की ज़रूरत भी कम कर रही है।

    2012 से 2024 तक भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों की वृद्धि

    स्ट्रीम का नाम

    2012-13

    2023-24

    ग्रोथ (प्रतिशत में)

    इंजीनियरिंग कॉलेज

    3,371

    8,876

    163%

    एआईएसएचई सर्वेक्षण के अनुसार, 2012-13 और 2023-24 के बीच, भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या लगभग तिगुनी हो गई है—यह संख्या 3,371 से बढ़कर 8,876 हो गई है, जो 163% की तगड़ी वृद्धि दर्शाती है। 2010-11 से 2023-24 तक की थोड़ी व्यापक समयावधि के दौरान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में स्नातक नामांकन 81% बढ़ा है और लगभग 2.34 मिलियन से बढ़कर 4.23 मिलियन से भी अधिक हो गया है।

    इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी स्नातक नामांकन 2010 से 2024 के दौरान वृद्धि

    स्ट्रीम का नाम

    2010-11

    2023-24

    ग्रोथ (प्रतिशत में)

    इंजीनियरिंग और तकनीकी

    23,40,506

    42,37,421

    81%

    कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग यूजी कार्यक्रम में नामांकन 2010 से 2024 तक

    स्ट्रीम का नाम

    2010-11

    2023-24

    ग्रोथ (प्रतिशत में)

    कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग

    4,75,870

    21,62,266

    354%

    पिछले एक दशक में, भारत में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी शिक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2010-11 से 2023-24 तक, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी में कुल नामांकन 81% बढ़कर 23.4 लाख से 42.3 लाख हो गया। सबसे उल्लेखनीय वृद्धि कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग में देखी गई, जहां नामांकन 354% बढ़कर 4.75 लाख से 21.62 लाख हो गया। छात्रों की संख्या में यह अभूतपूर्व वृद्धि इन स्नातकों की उद्योग जगत में मांग के अनुरूप नहीं है, जो कि बढ़ तो रही थी पर आपूर्ति की तुलना में काफी कम थी।

    शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों में कर्मचारी वृद्धि : 2010 बनाम 2025

    आईटी-सक्षम सेवाओं के लिए एक बेहतरीन आउटसोर्सिंग स्थल के रूप में भारतीय कंपनियों की बढ़ती मांग को देखते हुए, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट और एक्सेंचर जैसी अग्रणी आईटी फर्मों ने 2010 से अपने कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की और अपने कर्मचारियों की संख्या लगभग दोगुनी और तिगुनी तक पहुंचा दी है। इसके परिणामस्वरूप पिछले दो दशकों में इन कंपनियों के राजस्व और लाभ में भी वृद्धि हुई है।

    कंपनी

    कर्मचारियों की संख्या (2010)

    कर्मचारियों की संख्या

    (2025)

    वृद्धि दर (%)

    इन्फोसिस

    1,27,779

    3,17,240

    153 %

    टीसीएस

    1,60,429

    6,06,998

    278 %

    विप्रो

    1,08,071

    2,34,054

    116 %

    कॉग्निजेंट

    1,04,000

    3,36,300

    223 %

    एक्सेंचर

    2,04,000

    7,99,000

    291 %

    यह वृद्धि आईटी सेवा पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और इस अवधि में भारतीय कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए प्रौद्योगिकी समाधानों की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाती है।

    टीसीएस ने 12,000 वरिष्ठ, मध्य-स्तरीय कर्मचारियों की छंटनी की

    हालांकि, हाल ही में विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए छंटनी (layoff) की जो लहर चली, उसने कंपनियों के बदलते रुझान को दर्शाया है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), अब अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या में लगभग 2% की कटौती कर रही है, जिसका असर लगभग 12,000 कर्मचारियों पर पड़ेगा।

    btech-bubble

    मुद्रास्फीति लगभग दोगुनी हो गई, वेतन नहीं बढ़ा

    गौरतलब है कि पिछले दो दशकों में, जहां आईटीईएस कंपनियों ने ज़्यादा लोगों को रोजगार दिया, वहीं कैंपस से नए छात्रों को मिलने वाला वेतन स्थिर रहा। इसके कारण कैंपस से निकले छात्रों की वास्तविक आय 2010 की तुलना में आधी रह गई। 2010 से 2025 तक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) लगभग दोगुना हो गया - 100 से बढ़कर 197 - जो कि जीवनयापन की लागत में 97% की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, वेतन लगभग स्थिर रहा, जिससे एक तरह से नए इंजीनियरिंग स्नातकों की वास्तविक आय में 49% से 60% की गिरावट आई।

    टीसीएस

    2007

    2025

    राशि में अंतर

    मुद्रास्फीति की दर के नजरिये से वेतन में गिरावट

    मुद्रास्फीति के संबंध में वेतन में गिरावट का प्रतिशत


    सहायक सिस्टम इंजीनियर

    3,15,787

    3,36,875

    7,89,467

    4,73,680

    60%


    इन्फोसिस

    2010

    2025

    राशि में अंतर

    मुद्रास्फीति की दर के नजरिये से वेतन में गिरावट

    मुद्रास्फीति के संबंध में वेतन में गिरावट का प्रतिशत


    सिस्टम इंजीनियर - प्रशिक्षु

    3,25,008

    3,60,000

    6,40,265

    3,15,257

    49%

    हालांकि कागजों पर वेतन में वृद्धि हुई, लेकिन वास्तविक मूल्य में इसमें गिरावट आई, जिससे आज के फ्रेशर्स की आर्थिक स्थिति 15 साल पहले के लोगों से भी बदतर हो गई।

    एआई अपनाने में वृद्धि के कारण आईटी रोजगार वृद्धि में गिरावट शुरू हो गई

    जैसा कि पहले बताया गया है, भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों ने 2010 से 2025 तक भारी तादाद में भर्तियां कीं जिससे उनके कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दिखी, और वैश्विक स्तर पर उनके कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि हुई। हालांकि, पिछले दो वर्षों में कहानी में बदलाव दिखने लगा है। 2023 और 2025 के बीच, उन्हीं कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। हालिया आंकड़े:

    कंपनी

    कर्मचारियों की संख्या 2023

    कर्मचारियों की संख्या 2024

    कर्मचारियों की संख्या 2025

    वृद्धि प्रतिशत में (2023–2025)

    टीसीएस

    6,14,795

    6,06,998

    6,07,979

    –1.11%

    इन्फोसिस

    3,43,234

    3,17,240

    ~3,20,000

    –6.77%

    विप्रो

    2,56,921

    234,054

    2,33,232

    –9.22%

    एचसीएलटेक

    2,25,944

    2,27,481

    2,23,420

    –1.12%

    टेक महिंद्रा

    1,52,400

    ~1,45,455

    1,48,731

    –2.41%

    इन प्रमुख कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में गिरावट के आंकड़े महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करते हैं। कई वर्षों तक लगातार अच्छी भर्तियां करने के बाद, कंपनियां अब अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रही हैं। इस मंदी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन का बढ़ता चलन है।

    एआई टूल और प्लेटफ़ॉर्म अब कई ऐसे काम करने में सक्षम हैं जिनके लिए पहले इंजीनियरों की बड़ी टीमों की आवश्यकता होती थी। सॉफ़्टवेयर टेस्टिंग से लेकर नियमित कोडिंग और कस्टमर सपोर्ट तक, कई प्रक्रियाएं स्वचालित हो गई हैं। इससे शुरुआती स्तर और पुनरावृत्ति वाले कामों के लिए नौकरियों की मांग कम हो गई है, जिसके चलते पूरे उद्योग में लोगों की जरूरत घटी है और छंटनी (layoff) हो रही है। इसके अलावा, कंपनियां दक्षता पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। क्लाइंट अब कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम किए जाने की उम्मीद करते हैं, जिससे आईटी कंपनियां काम को कम कर्मचारियों से चलाने के लिए प्रयास कर रही हैं।

    हालांकि 2010 से 2025 तक की समग्र वृद्धि प्रभावशाली रही है, लेकिन नियुक्तियों में हालिया गिरावट इस बात का संकेत है कि आईटी नौकरी बाजार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। भविष्य के अवसरों के लिए केवल पारंपरिक आईटी भूमिकाओं के बजाय, एआई, डेटा विज्ञान, क्लाउड कंप्यूटिंग और नई टेक्नोलॉजी में उन्नत कौशल की आवश्यकता होगी।

    तकनीकी नियुक्ति पर स्वचालन (Automation) और एआई (AI) का प्रभाव

    नए सौदे हासिल करते समय आईटी कंपनियों के लिए कम लागत अहम मसला बन गया है। क्लाइंट अब उच्च उत्पादकता की मांग कर रहे हैं, या तो समान कर्मचारियों के साथ अधिक काम करवाकर या कम कर्मचारियों के साथ समान परिणाम प्राप्त करके। दूसरा तरीका विशेष रूप से छंटनी (layoff) को बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि मांग कम होने पर कंपनियां को अतिरिक्त कर्मचारियों को जॉब पर बनाए रखने में मुश्किल आती है।

    नियम-आधारित, दोहराव वाली और स्वचालित कामों से जुड़ी भूमिकाओं पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इनमें शामिल हैं:

    • टेस्टिंग इंजीनियर

    • एप्लीकेशन टेस्टर्स

    • क्यूए टेस्टर

    • सॉफ्टवेयर टेस्ट इंजीनियर और

    • क्यूए इंजीनियर.

    ये पद, जो अत्यधिक यंत्रवत् और प्रक्रिया-संचालित हैं, स्वचालन और एआई उपकरणों के माध्यम से तेजी से प्रतिस्थापित या कम किए जा रहे हैं। वर्तमान में, आईटी सेक्टर में टेस्टिंग और क्यूए/क्यूसी कार्यों में 36% से 40% कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी पदों पर कार्य कर रहे लोगों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है क्योंकि कंपनियां एआई के उपयोग से बेहतर दक्षता के साथ अपने व्यवसाय को सुचारू ढंग से चलाने की दिशा में प्रयासरत हैं।

    तकनीकी नियुक्ति की बदलती गतिशीलता

    तकनीकी नियुक्ति परिदृश्य में दो प्रमुख कारकों के कारण बड़ा परिवर्तन हो रहा है।

    सबसे पहले, एआई के आने से उद्योग जगत का स्वरूप बदल रहा है। प्रवेश स्तर, दोहराव वाली भूमिकाएं स्वचालन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं। जैसे-जैसे कंपनियाँ एआई और उन्नत तकनीकों को अपना रही हैं, वे टीमों को सुदृढ़ बना रही हैं और एआई, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक कौशल वाले पेशेवरों की तलाश कर रही हैं।

    दूसरा, मांग में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। टीसीएस के सीईओ, श्री के. कृतिवासन ने कहा, "निर्णय लेने में देरी होती है और विवेकाधीन खर्चों के साथ परियोजना शुरू होती, यह चलन बना रहा और इस तिमाही में इसमें और बढ़ोतरी हुई है।" कई कंपनियों को, खासकर उत्तरी अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों से, क्लाइंट प्रोजेक्ट इनफ्लो में गिरावट देखने को मिल रही है। इस मंदी के कारण भर्ती प्रक्रिया में सावधानी बरती जा रही है और दक्षता बढ़ाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

    आज के बदलते बाजार में तकनीकी कंपनियों द्वारा की जाने वाली भर्ती और कार्यबल नियोजन के नजरिए को यह कारक पुनः परिभाषित करने का काम कर रहे हैं।

    अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां छंटनी कर रही हैं (भारत में स्थित)

    ऐसा नहीं है कि केवल भारतीय आईटी कंपनियां ही कर्मचारियों की छंटनी (layoffs in India) कर रही हैं, बल्कि भारत में अपनी सेवाएं देने वाली अंतरराष्ट्रीय दिग्गज आईटी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रही हैं।

    2025 में, माइक्रोसॉफ्ट ने दुनिया भर में 15,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी (tech layoffs) की घोषणा की, जिसमें 9,000 छंटनी (job layoffs) जुलाई में की गई। इसी तरह, अमेज़न के AWS विभाग ने, लगभग 17% की राजस्व वृद्धि के बावजूद, सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी (tech layoffs) की, जिसमें भारत में कार्यरत तकनीकी और सहायक कर्मचारी भी शामिल थे। यह बढ़ते एआई निवेश से जुड़ी व्यापक लागत-कटौती का एक हिस्सा था।

    गूगल ने भी इस साल अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है, जो कि उन्नत एआई तकनीकों और कमज़ोर होती मांग के संयोजन से प्रेरित है। इस बीच, इंटेल ने पहले ही ओरेगॉन और कैलिफोर्निया जैसे कई अमेरिकी शहरों में छंटनी (tech layoffs) की है, और एआई-आधारित अनुसंधान और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए और भी छंटनी (job layoffs) की योजना पर काम चल रहा है।

    ये छंटनियां इस बात पर प्रकाश डालती है कि किस प्रकार एआई का आगमन और बाजार की बदलती जरूरतें वैश्विक टेक वर्कफोर्स को बहुत प्रभावित कर रही हैं, तथा भारत - जो प्रमुख प्रतिभा केंद्र है - पर इसका भारी असर पड़ रहा है।

    छात्रों के लिए सलाह: नए तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयारी

    ऐसा नहीं है कि तकनीकी कौशल गायब हो रहे हैं—यह बस बदल रहा है। यह बदल रहा है। जैसे-जैसे एआई और ऑटोमेशन उद्योग को नया रूप दे रहे हैं, छात्रों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अपनी शिक्षा और कॅरियर रणनीतियों में बदलाव लाना होगा।

    • कागजी प्रमाणपत्रों के बजाय कौशल का प्रमाण : किसी अच्छी टेक कंपनी में नौकरी पाना ज़्यादा प्रतिस्पर्धी होगा। छात्रों को खुद को कुशल बनाकर आगे रहना होगा। बी.टेक डिग्री का सिर्फ़ एक कागज़ी प्रमाण पत्र काम नहीं आ सकता। कंपनियां सिर्फ़ शैक्षणिक योग्यता से ज्यादा व्यावहारिक कौशल और वास्तविक दुनिया के अनुभव को महत्व देती हैं।

    • जल्दी शुरू करें : उद्योग में अनुभव प्राप्त करने के लिए अपने अंतिम वर्ष तक प्रतीक्षा न करें। पहले वर्ष से ही इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और व्यावहारिक अनुभव बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

    • अपने कौशल में विविधता लाएं : डोमेन ज्ञान को कंप्यूटर विज्ञान कौशल के साथ मिलाएं। अपने क्षितिज को व्यापक बनाने के लिए वैश्विक अवसरों और दूरस्थ कार्य विकल्पों का अन्वेषण करें।

    • हमेशा एक बैकअप योजना रखें : लचीले बने रहें। कई कौशल विकसित करें ताकि बाजार की मांग बदलने पर आप बदलाव कर सकें।

    पिछले एक दशक में भारतीय तकनीकी उद्योग ने प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है, लेकिन हाल के रुझान बताते हैं कि यह परिदृश्य तेज़ी से विकसित हो रहा है। एआई और स्वचालन, नियुक्ति के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहे हैं, पारंपरिक पदों की मांग को कम कर रहे हैं और नए क्षेत्रों में अवसर पैदा कर रहे हैं। प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियां, वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के साथ, इन बदलावों के अनुरूप अपनी कार्यबल रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं।

    छात्रों और पेशेवरों के लिए, यह अनुकूलन का एक महत्वपूर्ण समय है। प्रासंगिक, भविष्य-अनुकूल कौशल विकसित करना, उद्योग में निरंतर अनुभव प्राप्त करना और लचीला बने रहना, तकनीक के इस नए युग में फलने-फूलने के लिए महत्वपूर्ण होगा। अवसर अभी भी मौजूद हैं—लेकिन ये अवसर उन लोगों के लिए हैं जो उद्योग के साथ विकसित होने के लिए तैयार हैं।

    उन अभिभावकों और छात्रों के लिए, जो मानते हैं कि बी.टेक की डिग्री उन्हें नौकरी दिला देगी, यह एक चेतावनी हो सकती है। हालात के अनुसार ढल जाएं। सतर्क रहें। खुद को कुशल बनाएं। और अपने प्लान बी पर काम करना शुरू करें। क्योंकि इस बात की पूरी संभावना है कि बी.टेक का बुलबुला, खासकर कोडिंग इंजीनियरों के लिए, फुटने वाला है!

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